Friday, August 21, 2009
पटेल ने ही लगाई थी संघ पर पाबंदी
अपनी किताब में भारत-पाक विभाजन कि लिए सरदार पटेल को दोषी ठहराने के कारण भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से बेआबरू होकर निकाले गए जसवंत सिंह ने बीजेपी और संघ के नेताओं को याद दिलाया है कि वह सरदार पटेल ही थे, जिन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर सबसे पहले प्रतिबंध लगाया था। बीजेपी ने सरदार पटेल पर जसवंत की टिप्पणी को अनुशासन हीनता और मूल्यों के खिलाफ बताया था। जसवंत सिंह ने कहा कि "मुझे नहीं मालूम की बीजेपी किस आस्था की बात कर रही है, जबकि सरदार पटेल ही वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया। उन्होंने कहा कि मुझे मालूम नहीं कि मैंने मूल आस्था के किस अंश को छेड़ा है"।जसवंत सिंह ने बीजेपी को यह भी याद दिलाया कि जब आडवाणी ने जिन्ना को महान बताया था तह पार्टी ने उनके खिलाफ कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया था, बल्कि पार्टी उनके साथ खड़ी थी। ऐसे में पार्टी उनके साथ भेदभव पूर्ण रवैय्या अपना रही है। खुद को आरएसएस से अलग बताते हुए जसवंत ने साफ कहा कि "मैं कभी आरएसएस से जुड़ा नहीं रहा न ही मेरे कभी इनके साथ संबंध ही रहे हैं"। नरेंद्र मोदी सराकर द्वारा उनकी किताब पर गुजरात में लगाए गए प्रतिबंध की आलोचना करते हुए जसवंत ने कहा कि यह किताब पर नहीं, बल्कि सोच पर प्रतिबंध है। सबको व्यक्तिगत रूप से और मिलकर इस बारे में सोचना चाहिए। जसवंत सिंह को उनकी किताब- 'जिन्ना: भारत, विभाजन, आजादी' में जिन्ना को विभाजन के दोष के लिए बरी करने और जवाहरलाल नेहरू के साथ सरदार वल्लभ भाई पटेल पर उंगली उठाने के लिए बुधवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से बर्खास्त कर दिया गया। आरएसएस ने जसवंत सिंह के विचारों को खारिज करते हुए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए दबाव बनाया था।
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